शनिवार, 21 जनवरी 2017

#NohouseNovote

दोस्तों चुनाव की प्रक्रिया के हम विरोधी नहीं हैं, लेकिन जिस तरह पिछले सात साल से नेताओं ने हमे नज़रअंदाज़ किया उसके बाद उन्हें क्यों वोट दिया जाए. हम कराह रहे थे और नेता भाषण देने में मजबूर रहे. जिस अथॉरिटी को आम लोगों के प्रति जवाबदेह होना चाहिए, उसके आगे घर खरीदने वाले और किसान प्रदर्शन करते रहे और अथॉरिटी बिल्डर के हितों का पूरा ख्याल रखती रही. आखिर हम चुनाव का बहिष्कार न करें तो क्या करें. हमे लोकतंत में क्या न्याय के लिए सिर्फ कोर्ट का सहारा ही बचा है. बाकी जो नेता , अफसर हमारे टैक्स के पैसे से ऐशो आराम से रहते हैं, उनकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं. इस बार #Nohousenovote सन्देश ज़ोर से जाए ताकि अगली बार जो आये हमे न भूल  जाये 

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